रूह भी तड़पी होगी ,
रूहानियत भी कपकपाई होगी !
जब उनकी दरिन्दगीं ,
उसके जिस्मों पे छाई होगी !!
शायद ये दुश्य देख ,
ब्रम्हा भी कांपे होगें !
ताडंव बनके फिर केरल मे ,
अथाह वो बरसे होगें !!
रूह भी तड़पी होगी ,
रूहानियत भी कपकपाई होगी !
जब उनकी दरिन्दगीं ,
उसके जिस्मों पे छाई होगी !!
शायद ये दुश्य देख ,
ब्रम्हा भी कांपे होगें !
ताडंव बनके फिर केरल मे ,
अथाह वो बरसे होगें !!